जय वायु देवता, ओम जय वायु देवता।प्राण रक्षक देवा, जीवन के दाता॥
॥ जय वायु देवता ॥
हनुमान के पिता तुम, मारुत नंदन।शक्ति बल और वेग में, तुम हो गुण-गण॥
॥ जय वायु देवता ॥
उत्तर-पश्चिम दिशा के, दिगपाल तुम देव।अष्ट दिगपालों में, करते जग-सेव॥
॥ जय वायु देवता ॥
पंचतत्व में एक, वायु का महत्व।बिना श्वास के जीव का, नहीं कोई मत्व॥
॥ जय वायु देवता ॥
वेद मंत्रों में पूजित, पवन देव महान।प्राण-वायु रूप में, तुम जीवन का प्राण॥
॥ जय वायु देवता ॥

