अम्बे माता

अम्बे माता

अम्बे माता प्रेममयी और शक्तिशाली जगदम्बा हैं, जिन्हें भक्त आद्या शक्ति, दुर्गा और माँ अम्बा के रूप में पूजते हैं।

सरल मन्त्र

ॐ अम्बे मातायै नमः

दिन

शुक्रवार

रंग

लाल

भोग

खीर

पर्व

नवरात्रि

दुर्गा पूजा

संक्षिप्त तथ्य

मुख्य भाव

रक्षा, मातृ-कृपा, साहस, धर्म की विजय और पारिवारिक कल्याण

पवित्र सम्बन्ध

नवरात्रि, दुर्गा-पूजन, गरबा-भक्ति और अम्बाजी जैसे शक्ति-धाम

अम्बे माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

अम्बे माता प्रेममयी और शक्तिशाली जगदम्बा हैं, जिन्हें भक्त आद्या शक्ति, दुर्गा और माँ अम्बा के रूप में पूजते हैं।

अम्बे माता जी की कथा

माता अंबे जिन्हें अंबा, अम्बिका और दुर्गा माता के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में शक्ति, साहस, रक्षा और मातृत्व की देवी मानी जाती हैं। वे आदिशक्ति का स्वरूप हैं और संसार की रक्षा करने वाली दिव्य माता के रूप में पूजी जाती हैं। भक्त उन्हें अपनी रक्षा करने वाली, दुखों को दूर करने वाली और जीवन में शक्ति प्रदान करने वाली देवी मानते हैं।
प्राचीन समय में महिषासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया कि कोई भी देवता या पुरुष उसका वध नहीं कर सकेगा। इस वरदान के कारण वह अत्यंत अहंकारी बन गया और देवताओं, ऋषियों तथा मनुष्यों पर अत्याचार करने लगा। उसने स्वर्गलोक पर भी अधिकार कर लिया और सभी देवता भयभीत होकर इधर-उधर छिपने लगे।
असुरों के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास पहुँचे। देवताओं का दुख देखकर तीनों देव अत्यंत क्रोधित हुए। उनके क्रोध और दिव्य शक्तियों से एक तेजस्वी प्रकाश उत्पन्न हुआ। सभी देवताओं की शक्तियाँ मिलकर एक दिव्य स्त्री रूप में प्रकट हुईं — यही थीं माता अंबे।
माता अंबे का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली था। उनके अनेक हाथ थे और प्रत्येक हाथ में देवताओं द्वारा दिए गए दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। भगवान शिव ने उन्हें त्रिशूल दिया, भगवान विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र और अन्य देवताओं ने भी अपनी-अपनी शक्तियाँ उन्हें अर्पित कीं। उनका वाहन सिंह था, जो साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

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