
हनुमान जी
हनुमान जी उपासना बल, निर्भयता और श्रीराम भक्ति के लिए की जाती है।
हनुमान जी अष्टक (प्रारंभिक पंक्ति मंत्र)
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,तीनहु लोक भयो अंधियारो|
दिन
मंगलवार
रंग
सिंदूरी
भोग
बूंदी
पर्व
हनुमान जयंती
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संक्षिप्त तथ्य
पाठ शैली
एक समय में एक पाठ
मुख्य भाव
बल, निर्भयता और श्रीराम के प्रति भक्ति
हनुमान जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
हनुमान जी उपासना बल, निर्भयता और श्रीराम भक्ति के लिए की जाती है।
हनुमान जी की कथा
हनुमान जी सनातन धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। उन्हें शक्ति (बल), भक्ति, साहस (वीरता) और निःस्वार्थ सेवा (सेवा) का प्रतीक माना जाता है। वे रामायण के प्रमुख पात्र हैं और पूरे भारत तथा दुनिया भर में रक्षक और संकट दूर करने वाले के रूप में पूजे जाते हैं। कहा जाता है कि जब मन भय या भ्रम में होता है, तब हनुमान जी का स्मरण तुरंत स्थिरता देता है। उनकी शक्ति दिखाई नहीं देती, लेकिन वह बहुत प्रभावशाली होती है बिल्कुल वायु की तरह। जन्म से ही अपार शक्ति होने के बावजूद उन्होंने अहंकार नहीं, बल्कि सेवा का मार्ग चुना। यही उन्हें महान बनाता है।
हनुमान जी का जन्म माता अंजना के गर्भ से हुआ और उन्हें पवन देव (वायु देव) का पुत्र माना जाता है, इसलिए उन्हें पवन पुत्र भी कहा जाता है। कई मान्यताओं के अनुसार वे भगवान शिव के अंश या अवतार भी हैं।
बाल्यकाल में ही हनुमान जी बहुत चंचल और शक्तिशाली थे। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार उन्होंने सूर्य को फल समझकर आकाश में छलांग लगा दी थी। इस घटना से उनकी अपार शक्ति और निडरता का पता चलता है। बचपन से ही उनमें असाधारण बुद्धि और दिव्य ऊर्जा थी।
हनुमान जी के जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन तब आया जब उनकी भेंट भगवान राम से हुई। उस क्षण से वे उनके सबसे बड़े भक्त बन गए और अपना पूरा जीवन उनकी सेवा में समर्पित कर दिया।
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