बगलामुखी माता

बगलामुखी माता

बगलामुखी माता दशमहाविद्याओं में से एक पीताम्बरा देवी हैं, जो रक्षा, दुष्ट वाणी के स्तम्भन और अनुशासित साधना से विजय प्रदान करती हैं।

सरल मन्त्र

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः

दिन

मंगलवार

रंग

पीला

भोग

हलवा

पर्व

नवरात्रि

संक्षिप्त तथ्य

मुख्य भाव

रक्षा, हानिकारक वाणी पर विजय और अनुशासित आध्यात्मिक साहस

आवश्यक सीमा

गूढ़ बगलामुखी साधना केवल योग्य गुरु से सीखकर ही करनी चाहिए

बगलामुखी माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

बगलामुखी माता दशमहाविद्याओं में से एक पीताम्बरा देवी हैं, जो रक्षा, दुष्ट वाणी के स्तम्भन और अनुशासित साधना से विजय प्रदान करती हैं।

माँ बगलामुखी जी की कथा

माँ बगलामुखी जिन्हें पीताम्बरा देवी, स्तम्भन शक्ति और दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में जाना जाता है, हिंदू धर्म में शत्रुओं का नाश करने वाली, वाणी को नियंत्रित करने वाली, संकटों से रक्षा करने वाली और विजय प्रदान करने वाली परम शक्तिशाली देवी मानी जाती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत रहस्यमय, तेजस्वी और तांत्रिक साधनाओं में विशेष महत्व रखने वाला है। भक्त उन्हें न्याय, सुरक्षा, विजय और आत्मबल प्रदान करने वाली माँ के रूप में पूजते हैं।
पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार एक समय सृष्टि पर भयंकर संकट आ गया। एक अत्यंत प्रचंड तूफान और विनाशकारी आंधी ने तीनों लोकों को हिलाकर रख दिया। पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल में भय का वातावरण व्याप्त हो गया। देवताओं को लगा कि यदि यह प्रलयकारी शक्ति नहीं रुकी, तो समस्त सृष्टि का विनाश हो जाएगा।
देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित हरिद्रा सरोवर के निकट कठोर तपस्या की और आदिशक्ति का आह्वान किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर एक दिव्य पीले प्रकाश से माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। उनका सम्पूर्ण स्वरूप स्वर्णिम आभा से युक्त था और उन्होंने पीले वस्त्र धारण किए हुए थे।
माँ के प्रकट होते ही उनकी दिव्य स्तम्भन शक्ति ने उस विनाशकारी तूफान को रोक दिया। सृष्टि में पुनः शांति स्थापित हो गई। देवताओं ने उनकी स्तुति की और उन्हें स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्वीकार किया। तभी से माँ बगलामुखी को ऐसी देवी माना जाता है जो अनियंत्रित और विनाशकारी शक्तियों को रोक सकती हैं।

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