
भैरव बाबा
भैरव बाबा, विशेष रूप से काल भैरव के रूप में पूजित, भगवान शिव का शक्तिशाली स्वरूप हैं जो रक्षा, अनुशासन, समय-बोध और भय-निवारण से जुड़े हैं।
काल भैरव मन्त्र
ॐ कालभैरवाय नमः
दिन
रविवार
रंग
काला
भोग
बूंदी
पर्व
महाशिवरात्रि
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संक्षिप्त तथ्य
मुख्य भाव
रक्षा, निर्भयता, समय-अनुशासन, बाधा-निवारण और शिव-भक्ति
पवित्र सम्बन्ध
काल भैरव, क्षेत्रपाल स्वरूप, अष्टमी उपासना और कुत्तों के प्रति करुणा
भैरव बाबा की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
भैरव बाबा, विशेष रूप से काल भैरव के रूप में पूजित, भगवान शिव का शक्तिशाली स्वरूप हैं जो रक्षा, अनुशासन, समय-बोध और भय-निवारण से जुड़े हैं।
श्री काल भैरव बाबा की कथा
श्री काल भैरव बाबा भगवान शिव के अत्यंत शक्तिशाली, उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। उन्हें भैरवनाथ, कालभैरव, बटुक भैरव, क्षेत्रपाल और काशी के कोतवाल के नामों से भी जाना जाता है। वे समय (काल), मृत्यु, न्याय, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के अधिष्ठाता देवता हैं। भक्त उन्हें भय, संकट, शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाले दिव्य देवता के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं।
शिव पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार एक समय भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि उनमें श्रेष्ठ कौन है। उसी समय ब्रह्मा जी के पाँचवें मुख से अहंकारपूर्ण वचन निकले। उन्होंने स्वयं को सर्वोच्च बताना प्रारंभ कर दिया। यह देखकर भगवान शिव ने धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपना उग्र स्वरूप प्रकट किया।
भगवान शिव के तेज से एक दिव्य और भयंकर पुरुष प्रकट हुए। उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी, काला और अग्नि के समान प्रचंड था। यही दिव्य शक्ति काल भैरव के रूप में प्रकट हुई। भगवान शिव ने उन्हें आदेश दिया कि वे ब्रह्मा जी के अहंकार का नाश करें और धर्म की स्थापना करें।
भगवान भैरव ने अपने नख के अग्रभाग से ब्रह्मा जी के पाँचवें सिर को अलग कर दिया। उसी क्षण ब्रह्मा जी का अहंकार समाप्त हो गया। किंतु ब्रह्मा का सिर काटने के कारण काल भैरव पर ब्रह्महत्या का दोष लगा और वह कपाल उनके हाथ से चिपक गया।
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