ब्रह्मा जी

ब्रह्मा जी

ब्रह्मा जी त्रिमूर्ति के सृष्टिकर्ता, वेदों के अधिष्ठाता, ब्रह्माण्डीय व्यवस्था और सृजन के दिव्य आरम्भ के देव माने जाते हैं।

सरल ब्रह्मा मंत्र

ॐ ब्रह्मणे नमः

दिन

गुरुवार

रंग

पीला

भोग

पंचामृत

संक्षिप्त तथ्य

दिव्य भूमिका

सृष्टिकर्ता, प्रजापति और वेदों के अधिष्ठाता

प्रतीक

चार मुख, चार वेद, कमलासन, हंस वाहन

भक्ति का केंद्र

ज्ञान, सृजनशीलता, शुभ आरम्भ, विवेक

ब्रह्मा जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

ब्रह्मा जी त्रिमूर्ति के सृष्टिकर्ता, वेदों के अधिष्ठाता, ब्रह्माण्डीय व्यवस्था और सृजन के दिव्य आरम्भ के देव माने जाते हैं।

भगवान ब्रह्मा जी की कथा

भगवान ब्रह्मा हिंदू धर्म की त्रिमूर्ति के प्रथम देव हैं, जिन्हें सृष्टि के रचयिता के रूप में जाना जाता है। वे ज्ञान, विद्या, सृजन और वेदों के अधिष्ठाता देव माने जाते हैं। उनकी चार भुजाएँ और चार मुख हैं, जो चारों दिशाओं और चारों वेदों के प्रतीक हैं। उनकी अर्धांगिनी माता सरस्वती हैं, जो विद्या और वाणी की देवी हैं। भगवान ब्रह्मा का वाहन हंस है, जो विवेक और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
सृष्टि के आरंभ में जब चारों ओर केवल जल ही जल था और घोर अंधकार व्याप्त था, तब भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन कर रहे थे। उनकी नाभि से एक दिव्य कमल प्रकट हुआ और उस कमल पर भगवान ब्रह्मा प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने जब चारों ओर दृष्टि डाली तो उन्हें केवल जल और अंधकार दिखा। वे यह जानना चाहते थे कि वे कौन हैं और उनका उद्देश्य क्या है।
ब्रह्मा जी कमल के डंठल में नीचे उतरने लगे यह जानने के लिए कि यह कमल कहाँ से आया है। वे बहुत समय तक खोजते रहे, परंतु उन्हें उत्तर नहीं मिला। तब उन्होंने ध्यान किया और भगवान विष्णु के दर्शन हुए। भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा — 'हे ब्रह्मा! तुम्हें इस सृष्टि का निर्माण करना है। तुम जगत के पिता और सृष्टिकर्ता हो।' यह आदेश पाकर ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण का कार्य आरंभ किया।
भगवान ब्रह्मा ने सर्वप्रथम अपने मन से महर्षियों की रचना की, जिन्हें 'मानस पुत्र' कहा जाता है। इनमें सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार प्रमुख थे। परंतु ये चारों विरागी थे और उन्होंने सृष्टि विस्तार में सहयोग करने से मना कर दिया। इससे ब्रह्मा जी अत्यंत दुखी हुए और उनके मस्तक से रुद्र यानी भगवान शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने उन्हें भी सृष्टि बढ़ाने के लिए कहा।

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