
राम जी
राम जी उपासना धर्म, मर्यादा और करुणामय नेतृत्व के लिए की जाती है।
राम तारक मंत्र
श्री राम जय राम जय जय राम
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संक्षिप्त तथ्य
पाठ शैली
एक समय में एक पाठ
मुख्य भाव
धर्म, मर्यादा और करुणामय नेतृत्व
राम जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
राम जी उपासना धर्म, मर्यादा और करुणामय नेतृत्व के लिए की जाती है।
श्रीराम जी की कथा
भगवान श्रीराम की कथा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र और प्रेरणादायक कथाओं में से एक है। श्रीराम को भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। उनका जीवन सत्य, धर्म, आदर्श, त्याग और मर्यादा का प्रतीक है। इसी कारण उन्हें “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है।
बहुत समय पहले अयोध्या नगरी में राजा दशरथ का शासन था। वे एक महान और न्यायप्रिय राजा थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के फलस्वरूप उनकी तीन रानियों — कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा — को चार पुत्र प्राप्त हुए। कौशल्या से श्रीराम, कैकेयी से भरत तथा सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
चारों राजकुमार बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी, विनम्र और वीर थे। श्रीराम सभी के प्रिय थे। वे सत्यवादी, दयालु और धर्म का पालन करने वाले थे। लक्ष्मण अपने बड़े भाई राम से अत्यधिक प्रेम करते थे और हमेशा उनके साथ रहते थे।
एक दिन महर्षि विश्वामित्र अयोध्या आए और राजा दशरथ से आग्रह किया कि वे राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेजें ताकि वे राक्षसों से यज्ञ की रक्षा कर सकें। राम और लक्ष्मण ऋषि के साथ गए और उन्होंने ताड़का तथा अन्य दुष्ट राक्षसों का वध किया। इससे सभी ऋषि-मुनि प्रसन्न हुए।
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