महावीर जाहरवीर

महावीर जाहरवीर

महावीर जाहरवीर की उपासना भक्ति, सद्बुद्धि और आंतरिक स्थिरता के लिए की जाती है।

महावीर जाहरवीर मूल मंत्र

ॐ महावीर जाहरवीर नमः

दिन

मंगलवार

रंग

लाल

भोग

बूंदी

संक्षिप्त तथ्य

पाठ शैली

एक समय में एक अनुभाग

मुख्य भाव

भक्ति, स्पष्टता और आध्यात्मिक अनुशासन

महावीर जाहरवीर की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

महावीर जाहरवीर की उपासना भक्ति, सद्बुद्धि और आंतरिक स्थिरता के लिए की जाती है।

भगवान महावीर जाहरवीर की कथा

भगवान महावीर जाहरवीर हिंदू धर्म में अत्यंत चमत्कारी और शक्तिशाली लोकदेवता के रूप में पूजित हैं। वे विशेष रूप से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत में अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजे जाते हैं। भक्त उन्हें सर्पदंश से रक्षा करने वाले, विष का नाश करने वाले, असाध्य रोगों को दूर करने वाले और भक्तों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले देवता के रूप में पूजते हैं। उनकी महिमा इतनी अपार है कि उनके भक्त उन्हें साक्षात परमेश्वर का अवतार मानते हैं।
जाहरवीर गोगा जी की कथा राजस्थान के चुरू जिले के ददरेवा गाँव से प्रारंभ होती है। उनका जन्म विक्रम संवत् नौवीं-दसवीं शताब्दी के आसपास राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जेवर सिंह चौहान और माता का नाम बाछल देवी था। माता बाछल देवी दीर्घकाल तक निःसंतान रहीं और उन्होंने गुरु गोरखनाथ जी की घोर तपस्या की।
माता बाछल देवी की अनन्य भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर गुरु गोरखनाथ जी ने उन्हें एक दिव्य फल प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यह फल खाने से उन्हें एक असाधारण और चमत्कारी पुत्र की प्राप्ति होगी। माता बाछल देवी ने वह फल ग्रहण किया और उचित समय पर एक तेजस्वी और दिव्य बालक का जन्म हुआ। उस बालक का नाम गोगा रखा गया।
बालक गोगा बचपन से ही असाधारण शक्तियों और दिव्य गुणों से संपन्न था। गुरु गोरखनाथ जी के आशीर्वाद से उन्हें सर्पों पर अद्भुत नियंत्रण की शक्ति प्राप्त हुई। वे सर्पों के साथ खेलते थे और जहरीले से जहरीले सर्प भी उनके समक्ष शांत हो जाते थे। इसी कारण उन्हें जाहरवीर अर्थात विष पर विजय पाने वाले वीर के नाम से जाना जाने लगा।

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