राधा जी

राधा जी

राधा जी को प्रेम-भक्ति की पराकाष्ठा, श्रीकृष्ण की अनन्त प्रिया और दिव्य करुणा के माध्यम से भगवत्प्रेम तक पहुँचाने वाली अधिष्ठात्री माना जाता है।

सरल राधा मंत्र

ॐ राधायै नमः

दिन

शुक्रवार

रंग

पीला

भोग

खीर

संक्षिप्त तथ्य

दिव्य पहचान

राधारानी, कृष्णप्रिया, ह्लादिनी शक्ति, भक्ति की अधीश्वरी

पावन संबंध

बरसाना, वृन्दावन, कीर्तन, मधुर स्मरण

भक्ति का केंद्र

प्रेम, विनम्रता, समर्पण, कृष्ण-कृपा

राधा जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

राधा जी को प्रेम-भक्ति की पराकाष्ठा, श्रीकृष्ण की अनन्त प्रिया और दिव्य करुणा के माध्यम से भगवत्प्रेम तक पहुँचाने वाली अधिष्ठात्री माना जाता है।

राधा रानी जी की कथा

राधा रानी जिन्हें राधिका, राधे और वृषभानु नंदिनी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में प्रेम, भक्ति, करुणा और आत्मसमर्पण की सर्वोच्च देवी मानी जाती हैं। वे भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिया और आह्लादिनी शक्ति हैं। राधा रानी को श्रीकृष्ण की आत्मा का स्वरूप माना जाता है — जहाँ कृष्ण हैं, वहाँ राधा हैं और जहाँ राधा हैं, वहाँ कृष्ण। भक्त उन्हें प्रेम की देवी, परम भक्ति का साक्षात् स्वरूप और मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य माँ के रूप में पूजते हैं।
द्वापर युग की बात है। वृंदावन के निकट बरसाना नामक एक सुंदर ग्राम में वृषभानु जी नाम के एक धर्मपरायण और सज्जन ग्वाले रहते थे। उनकी पत्नी का नाम कीर्तिदा था। वे दोनों अत्यंत धर्मनिष्ठ थे और भगवान की भक्ति में लीन रहते थे। एक दिन वृषभानु जी यमुना नदी के तट पर स्नान करने गए। वहाँ उन्हें जल में एक कमल के फूल पर एक दिव्य और अलौकिक बालिका दिखाई दी। उस बालिका के मुख पर अद्भुत तेज और दिव्य आभा थी। वृषभानु जी अत्यंत प्रसन्न हुए और उस बालिका को अपने घर ले आए। यही दिव्य बालिका थीं — राधा रानी।
राधा रानी के जन्म के विषय में एक और पवित्र कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु के परम धाम गोलोक में एक दिव्य महायज्ञ हो रहा था। उस यज्ञ में सभी देवी-देवता उपस्थित थे। तभी भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति — जो उनकी परम प्रिया और चिरसंगिनी थीं — ने मानव लोक में अवतार लेने की इच्छा प्रकट की। ब्रह्मा जी और देवताओं की प्रार्थना पर वे वृषभानु जी की पुत्री के रूप में धरती पर अवतरित हुईं। इसीलिए राधा रानी को श्रीकृष्ण की शक्ति का ही साक्षात् स्वरूप माना जाता है।
राधा रानी का बचपन बरसाना और वृंदावन की पवित्र भूमि पर बीता। वे अत्यंत सुंदर, सरल और भावुक स्वभाव की थीं। गाय चराना, यमुना तट पर विहार करना और सखियों के संग खेलना उनका प्रिय कार्य था। उनके सौंदर्य और दिव्यता की चर्चा समस्त व्रज भूमि में होती थी। वे गोपियों में सबसे प्रमुख और श्रेष्ठ थीं। उनकी वाणी में माधुर्य, नेत्रों में करुणा और हृदय में असीम प्रेम था।

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