रानी सती दादी

रानी सती दादी

रानी सती दादी विशेष रूप से राजस्थान और मारवाड़ी परिवारों में साहस, मर्यादा, गृह-रक्षा और आशीर्वाद की दादी स्वरूप माता के रूप में पूजित हैं।

मूल मन्त्र

ॐ श्री रानी सती दादीयै नमः

दिन

शुक्रवार

रंग

सिंदूरी

भोग

फल

संक्षिप्त तथ्य

मुख्य भाव

रक्षा, साहस, पारिवारिक कल्याण और कठिन समय में धैर्य

आवश्यक मर्यादा

आज की रानी सती दादी भक्ति को ऐतिहासिक सती-प्रथा के समर्थन के रूप में नहीं समझना चाहिए

रानी सती दादी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

रानी सती दादी विशेष रूप से राजस्थान और मारवाड़ी परिवारों में साहस, मर्यादा, गृह-रक्षा और आशीर्वाद की दादी स्वरूप माता के रूप में पूजित हैं।

रानी सती दादी जी की कथा

रानी सती दादी जिन्हें दादी जी, नारायणी देवी और शक्ति स्वरूपा माँ के नाम से भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है, विशेष रूप से राजस्थान, हरियाणा और मारवाड़ी समाज में अत्यंत पूजनीय हैं। वे साहस, पतिव्रता धर्म, त्याग, निष्ठा और आत्मबल की प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त उन्हें अपने परिवार की रक्षक, संकटों का निवारण करने वाली और मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाली मातृशक्ति के रूप में पूजते हैं।
लोक परंपराओं और प्राचीन कथाओं के अनुसार रानी सती दादी का पूर्वजन्म महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि वे उत्तरा के रूप में जन्मी थीं, जो राजा विराट की पुत्री और अभिमन्यु की पत्नी थीं। महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के वीरगति प्राप्त करने के बाद उत्तरा अत्यंत दुःखी हुईं। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे एक महान शक्ति स्वरूपा के रूप में पूजित होंगी।
कलियुग में उनका जन्म राजस्थान के एक प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार में नारायणी देवी के रूप में हुआ। बचपन से ही वे धर्मपरायण, साहसी और सद्गुणों से युक्त थीं। उनका विवाह एक वीर और धर्मनिष्ठ युवक तंदन जी से हुआ। दोनों का जीवन प्रेम, सम्मान और धार्मिक मूल्यों से परिपूर्ण था।
कथा के अनुसार तंदन जी के पास एक अत्यंत प्रिय और दुर्लभ घोड़ा था। एक स्थानीय शासक के पुत्र ने उस घोड़े को बलपूर्वक प्राप्त करने का प्रयास किया। जब तंदन जी ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया और अंततः युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।