
साईं बाबा
साईं बाबा की उपासना भक्ति, सद्बुद्धि और आंतरिक स्थिरता के लिए की जाती है।
साईं बाबा मूल मंत्र
ॐ साईं नमः
दिन
गुरुवार
रंग
श्वेत
भोग
फल
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संक्षिप्त तथ्य
पाठ शैली
एक समय में एक अनुभाग
मुख्य भाव
भक्ति, स्पष्टता और आध्यात्मिक अनुशासन
साईं बाबा की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
साईं बाबा की उपासना भक्ति, सद्बुद्धि और आंतरिक स्थिरता के लिए की जाती है।
भगवान साईं बाबा की कथा
भगवान साईं बाबा हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के भक्तों द्वारा समान श्रद्धा के साथ पूजित एक दिव्य संत और अवतारी पुरुष हैं। वे महाराष्ट्र के शिरडी नामक छोटे से गाँव में निवास करते थे और अपनी अलौकिक शक्तियों, करुणा, प्रेम और सादगी से लाखों भक्तों के जीवन को बदल दिया। भक्त उन्हें शिरडी वाले साईं बाबा, सबका मालिक एक के उद्घोषक और समस्त मानवता के परम हितैषी के रूप में पूजते हैं। उनका मूल संदेश था — श्रद्धा और सबुरी अर्थात विश्वास और धैर्य।
साईं बाबा के जन्म और प्रारंभिक जीवन के विषय में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। स्वयं साईं बाबा ने कभी अपने जन्म स्थान और माता-पिता के विषय में स्पष्ट नहीं बताया। कुछ भक्तों का मानना है कि वे महाराष्ट्र के पाथरी गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। कुछ अन्य उन्हें मुस्लिम फकीर का शिष्य मानते हैं। किंतु साईं बाबा ने सदैव इन भेदों से ऊपर उठकर मानवता की सेवा की।
साईं बाबा लगभग सोलह वर्ष की आयु में पहली बार शिरडी गाँव में प्रकट हुए। वे एक नीम के पेड़ के नीचे ध्यानमग्न अवस्था में बैठे थे। उनका तेजस्वी स्वरूप देखकर गाँव के लोग चकित रह गए। कुछ समय बाद वे अंतर्धान हो गए और फिर कुछ वर्षों बाद पुनः शिरडी आए। इस बार वे स्थायी रूप से शिरडी में रहने लगे।
शिरडी में साईं बाबा एक जीर्ण-शीर्ण मस्जिद में निवास करते थे जिसे उन्होंने द्वारकामाई नाम दिया। यह नाम उन्होंने हिंदू और मुस्लिम एकता के प्रतीक स्वरूप रखा। वे वहाँ धूनी जलाते थे और उस धूनी की भस्म को उदी कहते थे। यह उदी भक्तों को प्रसाद के रूप में देते थे और इसमें अद्भुत चमत्कारी शक्ति मानी जाती है।
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