
संतोषी माता
संतोषी माता संतोष, सरलता, धैर्य और सच्ची भक्ति से मनोकामना पूर्ण करने वाली करुणामयी माता के रूप में पूजित हैं।
सरल मन्त्र
ॐ संतोषी मातायै नमः
दिन
शुक्रवार
रंग
केसरिया
भोग
चना और गुड़
पाठ अनुभाग चुनें
एक अनुभाग चुनें और एकाग्र पठन मोड में पाठ जारी रखें।
संक्षिप्त तथ्य
मुख्य भाव
संतोष, गृह-शांति, धैर्य और मनोकामना सिद्धि
पारम्परिक भोग
गुड़ और चना, व्रत में खटाई से परहेज
संतोषी माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
संतोषी माता संतोष, सरलता, धैर्य और सच्ची भक्ति से मनोकामना पूर्ण करने वाली करुणामयी माता के रूप में पूजित हैं।
माँ संतोषी जी की कथा
माँ संतोषी हिंदू धर्म में संतोष, सुख, समृद्धि, पारिवारिक शांति और मनोकामना पूर्ण करने वाली करुणामयी देवी के रूप में पूजित हैं। उनका नाम ही उनके स्वरूप का परिचय देता है — जो अपने भक्तों को संतोष, तृप्ति और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। भक्त उन्हें संकटों का नाश करने वाली, दुःख दूर करने वाली और सरल भक्ति से प्रसन्न होने वाली माँ के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं।
लोक परंपराओं के अनुसार एक बार भगवान गणेश जी के पुत्र शुभ और लाभ ने अपने पिता से आग्रह किया कि उन्हें भी एक बहन चाहिए। गणेश जी ने अपने पुत्रों की इच्छा पूर्ण करने के लिए अपनी दिव्य शक्तियों से एक तेजस्विनी देवी को प्रकट किया। यह दिव्य शक्ति ही माँ संतोषी के रूप में प्रकट हुईं। देवताओं और ऋषियों ने उनका स्वागत किया और उन्हें संतोष, सुख तथा समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्वीकार किया।
माँ संतोषी की महिमा संसार में तब अधिक प्रसिद्ध हुई जब उन्होंने अपने भक्तों के जीवन से दुःख और अभाव दूर करना प्रारम्भ किया। कहा जाता है कि जो व्यक्ति जीवन में संतोष और श्रद्धा का पालन करता है, उस पर माँ विशेष कृपा करती हैं। वे केवल धन-संपत्ति ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और पारिवारिक सुख भी प्रदान करती हैं।
माँ संतोषी की सबसे प्रसिद्ध कथा एक निर्धन स्त्री की है जिसका नाम सावित्री बताया जाता है। सावित्री का विवाह एक साधारण युवक से हुआ था। उसके पति के बड़े भाई धनवान थे, लेकिन सावित्री और उसका पति अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत करते थे। परिवार के लोग उसका अपमान करते और उसे अनेक कष्ट सहने पड़ते थे।
पाठ अनुभाग चुनें
एक अनुभाग चुनें और एकाग्र पठन मोड में पाठ जारी रखें।

