शारदा माता

शारदा माता

शारदा माता, जिन्हें शारदा या सरस्वती के रूप में भी समझा जाता है, विद्या, वाणी, संगीत, स्मृति और निर्मल बुद्धि की माता हैं।

सरल मन्त्र

ॐ श्री शारदा देव्यै नमः

दिन

गुरुवार

रंग

पीला

भोग

खीर

पर्व

नवरात्रि

संक्षिप्त तथ्य

मुख्य भाव

विद्या, वाणी, अध्ययन, संगीत, स्मरण-शक्ति और स्पष्ट बुद्धि

पवित्र सम्बन्ध

शारदा-सरस्वती परम्परा और मैहर स्थित माँ शारदा का प्रसिद्ध धाम

शारदा माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

शारदा माता, जिन्हें शारदा या सरस्वती के रूप में भी समझा जाता है, विद्या, वाणी, संगीत, स्मृति और निर्मल बुद्धि की माता हैं।

माँ शारदा जी की कथा

माँ शारदा जिन्हें सरस्वती, वाग्देवी, भारती, वीणावादिनी और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में विद्या, बुद्धि, कला, संगीत, वाणी और आध्यात्मिक ज्ञान की सर्वोच्च देवी मानी जाती हैं। वे ब्रह्मा जी की शक्ति तथा समस्त ज्ञान का दिव्य स्रोत हैं। भक्त उन्हें अज्ञान का अंधकार दूर करने वाली, बुद्धि प्रदान करने वाली और जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने वाली माँ के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजते हैं।
पुराणों के अनुसार सृष्टि की रचना के प्रारंभ में जब भगवान ब्रह्मा ने संसार का निर्माण किया, तब उन्हें अनुभव हुआ कि सृष्टि में गति तो है, किंतु उसमें ज्ञान, संगीत, वाणी और अभिव्यक्ति का अभाव है। चारों ओर मौन और नीरसता व्याप्त थी। तब ब्रह्मा जी ने आदिशक्ति का ध्यान किया और उनसे सहायता की प्रार्थना की।
ब्रह्मा जी की प्रार्थना से एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई। उस ज्योति से एक अत्यंत तेजस्विनी देवी अवतरित हुईं। उनके हाथों में वीणा, पुस्तक, जपमाला और कमल सुशोभित थे। उनका वर्ण चन्द्रमा के समान उज्ज्वल था और वे श्वेत कमल पर विराजमान थीं। यही दिव्य शक्ति माँ शारदा के रूप में प्रकट हुईं।
माँ शारदा ने अपनी वीणा के मधुर स्वर से सृष्टि में संगीत, लय और सामंजस्य का संचार किया। उनके मुख से निकली वाणी ने जीवों को बोलने, विचार व्यक्त करने और ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता प्रदान की। उनके प्रभाव से समस्त संसार में बुद्धि, कला, साहित्य और शिक्षा का विकास होने लगा।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

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