
यम देव
यम देव की उपासना भक्ति, सद्बुद्धि और आंतरिक स्थिरता के लिए की जाती है।
यम देव मूल मंत्र
ॐ यमाय नमः
दिन
शनिवार
रंग
काला
भोग
काले तिल और तेल
पाठ अनुभाग चुनें
एक अनुभाग चुनें और एकाग्र पठन मोड में पाठ जारी रखें।
संक्षिप्त तथ्य
पाठ शैली
एक समय में एक अनुभाग
मुख्य भाव
भक्ति, स्पष्टता और आध्यात्मिक अनुशासन
यम देव की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
यम देव की उपासना भक्ति, सद्बुद्धि और आंतरिक स्थिरता के लिए की जाती है।
भगवान यमराज जी की कथा
भगवान यमराज जिन्हें धर्मराज, मृत्यु के देवता, पितृपति, कालदेव और न्यायाधीश के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में मृत्यु, कर्मफल, न्याय और धर्म के अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। वे प्रत्येक जीव के कर्मों का निष्पक्ष निर्णय करते हैं और उसके अनुसार स्वर्ग, नरक अथवा अगले जन्म की व्यवस्था करते हैं। भक्त उन्हें न्याय, सत्य, धर्म और कर्म के महत्व का स्मरण कराने वाले दिव्य देवता के रूप में पूजते हैं।
पुराणों के अनुसार भगवान यमराज सूर्यदेव और संज्ञा देवी के पुत्र हैं। उनकी बहन का नाम यमुना है, जिन्हें यमुना मैया के रूप में पूजा जाता है। यमराज को सूर्यपुत्र और वैवस्वत यम भी कहा जाता है। वे जन्म लेने वाले प्रथम मनुष्यों में से एक माने जाते हैं और मृत्यु के पश्चात धर्म के मार्ग पर चलकर देवत्व को प्राप्त हुए।
ब्रह्मा जी ने यमराज को एक अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा। उन्हें समस्त प्राणियों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने और मृत्यु के बाद उनके कर्मों के अनुसार न्याय करने का अधिकार प्रदान किया गया। तभी से वे धर्मराज के रूप में प्रसिद्ध हुए।
यमलोक को उनका दिव्य राज्य माना जाता है। वहाँ चित्रगुप्त नामक देवता प्रत्येक जीव के कर्मों का विस्तृत लेखा रखते हैं। जब किसी प्राणी का जीवनकाल समाप्त होता है, तब यमदूत उसकी आत्मा को यमलोक में ले जाते हैं, जहाँ धर्मराज उसके कर्मों के अनुसार न्याय करते हैं।
पाठ अनुभाग चुनें
एक अनुभाग चुनें और एकाग्र पठन मोड में पाठ जारी रखें।

